Why Putin Cant Hide The Massive Russian Casualty Rate In Ukraine Anymore

Why Putin Cant Hide The Massive Russian Casualty Rate In Ukraine Anymore

Владимир पुतिन की सबसे बड़ी कमजोरी अब खुलकर दुनिया के सामने आ गई है। यूक्रेन युद्ध में रूस ने जितने सैनिक खोए हैं, उतने उसने दूसरे विश्व युद्ध के बाद किसी भी जंग में नहीं गंवाए। ब्रिटिश खुफिया एजेंसी GCHQ की प्रमुख ऐन कीस्ट-बटलर ने हाल ही में ब्लेचले पार्क में एक बड़ा खुलासा किया। उनके मुताबिक, इस जंग में अब तक करीब 5 लाख रूसी सैनिक मारे जा चुके हैं।

यह आंकड़ा सिर्फ घायल सैनिकों का नहीं है। यह सिर्फ मरने वालों की संख्या है। क्रेमलिन इस सच को छुपाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रहा है। लेकिन सच्चाई अब रूसी समाज की दीवारों को तोड़कर बाहर आने लगी है। लोग अब सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर उनके बेटे, भाई और पति कहाँ गायब हो रहे हैं। If you enjoyed this article, you should look at: this related article.

खुफिया रिपोर्ट ने खोली पुतिन के दावों की पोल

पुतिन हमेशा से दिखाते आए हैं कि रूस इस युद्ध में मजबूत स्थिति में है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। GCHQ की डायरेक्टर ऐन कीस्ट-बटलर का कहना है कि पुतिन अब युद्ध के मैदान पर पीछे की तरफ बढ़ रहे हैं। रूसी सेना को डोनबास और बाकी मोर्चों पर हर एक स्क्वायर किलोमीटर आगे बढ़ने के लिए सैकड़ों सैनिकों की कुर्बानी देनी पड़ रही है।

क्रेमलिन आधिकारिक तौर पर अपनी सेना के नुकसान को छुपाता रहा है। लेकिन जब ब्रिटेन की शीर्ष सिग्नल्स इंटेलिजेंस एजेंसी सीधे तौर पर 5 लाख मौतों का आंकड़ा देती है, तो उसे खारिज करना आसान नहीं होता। यह खुफिया जानकारी सिर्फ बाहरी अनुमानों पर आधारित नहीं है। यह रूस के अंदरूनी मिलिट्री डेटा, खुफिया कॉल्स और लॉजिस्टिक इनपुट्स को इंटरसेप्ट करके निकाली गई है। For another angle on this event, check out the latest update from The Guardian.

रूस के स्वतंत्र मीडिया संगठन जैसे मेडुजा और मीडियाजोना भी लगातार रूसी सैनिकों की मौतों पर नजर रख रहे हैं। हालांकि उनके अनुमान आधिकारिक वसीयत और प्रोबेट रिकॉर्ड्स पर आधारित होने के कारण थोड़े कम (करीब 3.5 लाख) थे, लेकिन पश्चिमी खुफिया एजेंसियों के नए डेटा ने साफ कर दिया है कि असल आंकड़ा 5 लाख के पार पहुँच चुका है।

इतने बड़े नुकसान को छुपाने की तरकीबें

आप सोच रहे होंगे कि कोई देश 5 लाख मौतों को कैसे छुपा सकता है। पुतिन की मशीनरी इसके लिए कई तरह की चालें चल रही है।

  • मोबाइल श्मशान घाट: युद्ध की शुरुआत से ही रिपोर्ट्स आ रही हैं कि रूसी सेना मोर्चे पर ही शवों को ठिकाने लगाने के लिए मोबाइल क्रीमेटोरियम का इस्तेमाल कर रही है ताकि लाशें घर वापस न जाएँ।
  • लापता की श्रेणी: हजारों मृत सैनिकों को आधिकारिक तौर पर 'Missing in Action' (लापता) घोषित कर दिया जाता है। इसका दोहरा फायदा है—न तो मौत का आंकड़ा बढ़ता है और न ही सरकार को उनके परिवारों को मुआवजा देना पड़ता है।
  • दूरदराज के इलाकों से भर्ती: मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग जैसे बड़े और अमीर शहरों से बहुत कम लड़कों को जबरन सेना में भेजा जा रहा है। पुतिन जानते हैं कि अगर वहाँ के संभ्रांत परिवारों के बच्चे मरे, तो विद्रोह हो जाएगा। इसलिए साइबेरिया, दागेस्तान और सुदूर ग्रामीण इलाकों के गरीब युवाओं को पैसों का लालच देकर मोर्चे पर भेजा जा रहा है, जिनकी आवाज मॉस्को तक नहीं पहुँचती।

हर महीने 30 हजार से ज्यादा नए सैनिकों की बलि

रूस इस युद्ध में 'Human Wave' यानी इंसानी लहरों की रणनीति अपना रहा है। उनके पास आधुनिक हथियारों और सटीक रणनीति की कमी है, इसलिए वे केवल सैनिकों की संख्या के दम पर यूक्रेनी चौकियों को घेरने की कोशिश करते हैं।

फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब के एक हालिया बयान के मुताबिक, रूस हर महीने करीब 35,000 सैनिक खो रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 95% मौतें यूक्रेनी ड्रोन्स के हमलों के कारण हो रही हैं। यूक्रेनी सेना अब बेहद सटीक और खतरनाक फर्स्ट-पर्सन व्यू (FPV) ड्रोन्स का इस्तेमाल कर रही है, जिससे रूसी सैनिकों के पास बचने का कोई रास्ता नहीं बचता।

यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, रूस को मिलने वाली हर छोटी कामयाबी की कीमत बहुत भारी है। पिछले साल अक्टूबर में रूस जहां प्रति स्क्वायर किलोमीटर इलाके पर 67 सैनिक खो रहा था, वहीं इस साल अप्रैल तक यह आंकड़ा बढ़कर 179 सैनिक प्रति स्क्वायर किलोमीटर हो गया है। यानी पुतिन जमीन के एक छोटे से टुकड़े के लिए अपने सैकड़ों नागरिकों को मौत के मुंह में धकेल रहे हैं।

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क्या पुतिन के पास सैनिकों का बैकअप खत्म हो रहा है?

रूस की सबसे बड़ी चुनौती अब यह है कि वह जितने सैनिक खो रहा है, उतनी तेजी से नई भर्तियां नहीं कर पा रहा है। अर्थशास्त्रियों के अनुमान के मुताबिक, रूस वर्तमान में हर दिन 800 से 1,000 सैनिकों की भर्ती करने में कामयाब हो रहा है, जो महीने का लगभग 25,000 से 31,000 बैठता है।

गणित सीधा है। अगर आप हर महीने 35,000 सैनिक खो रहे हैं और केवल 28,000 नए सैनिक ला पा रहे हैं, तो आपकी सेना लगातार कमजोर हो रही है। पुतिन ने सितंबर 2022 में 3 लाख लोगों की जबरन लामबंदी (Mobilization) की थी, जिससे पूरे देश में डर और अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। लाखों युवा देश छोड़कर भाग गए थे। पुतिन दोबारा वैसा कदम उठाने से डर रहे हैं क्योंकि इससे उनके सत्ता की कुर्सी हिल सकती है।

इसी वजह से अब रूस अफ्रीका, नेपाल, क्यूबा और भारत जैसे देशों के नागरिकों को नौकरी या धोखे से अपनी सेना में शामिल कर रहा है। यह इस बात का सीधा सबूत है कि रूस के अंदर अब लड़ाकों की भारी कमी होने लगी है।

आगे क्या होने वाला है

पुतिन का यह सोचना कि वे लंबे समय तक इस सच को दबाए रखेंगे, उनकी बड़ी भूल है। यूक्रेन को अब पश्चिमी देशों से आधुनिक लड़ाकू विमान जैसे F-16, मिराज 2000 और स्वीडन से ग्रिपेन (Gripen) फाइटर जेट्स मिल रहे हैं। इसके साथ ही यूक्रेन लंबी दूरी की मिसाइलों से रूस के अंदरूनी इलाकों में स्थित तेल रिफाइनरियों और सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है।

अगर रूस इसी रफ्तार से अपने सैनिक खोता रहा, तो आने वाले कुछ महीनों में उसकी अग्रिम पंक्ति (Frontline) पूरी तरह बिखर सकती है। यूक्रेन इस समय रूस की लॉजिस्टिक्स सप्लाई लाइन को काटने पर काम कर रहा है। पुतिन के लिए अब यह जंग सिर्फ यूक्रेन को हराने की नहीं, बल्कि अपने ही देश के भीतर उठने वाले असंतोष से बचने की बन चुकी है। 5 लाख सैनिकों की मौत का यह सच आने वाले दिनों में रूस की राजनीति का रुख बदल सकता है।

LW

Leah Wood

Leah Wood is a meticulous researcher and eloquent writer, recognized for delivering accurate, insightful content that keeps readers coming back.